Thursday, December 9, 2010

एक सफ़र....उन पुरानी यादों के साथ


ये सच है कि अगर इन्सान को अपने सुखद अतीत से मिलने का मौका फिर से मिले या यु कहे कि उन वादियों में फिर से जाने का मौका मिले, उन रास्तों से इक बार फिर से गुजरने का मौका मिले तो चेहरे पर ख़ुशी की रंगत और आँखों में इक अजीब सी चमक आ जाती है।
ठीक कुछ ऐसा ही मेरे साथ हुआ जब मैंने अपने ई-मेल के इन्बोक्स में अपने कालेज (KIIT University) का वो मेल देखा जिसमे 6th सालाना कांवोकेसन में शामिल होने का बुलावा आया था। बस फिर क्या था, जल्दी से टिकट बुक होने लगे और नजरे ऑफिस में लगे कलेंडर पर टिक गई कि कब 1st दिसंबर आये और मै अपने उन बीते दिनों कि यादों को ताजा करने एक बार फिर से कैम्पस पहुचुं। खैर वो दिन भी आ गया और मै अपने सारे यादों को अपने दिलों में सजाएँ कोलेज कैम्पस पंहुचा। यही कोई सुबह के 10, 10:30 बज रहे होंगे जब मै कॉलेज के कैम्पस में पहुंचा और सबसे पहले अपने फैकल्टी से मिलना उचित समझा और मेरे कदम एक - एक कर सारे फैकल्टी के केबिन तक पहुच गये, अभी सोच के अजीब लगता है क्योंकि इक वो दिन था जब मै उस कैम्पस का हिस्सा था और डर के मारे अपने सबसे खतरनाक फैकल्टी प्रो. सुन्दरेसन के केबिन के पास से नहीं गुजरता था कि कही ये शुरु ना हो जाये कि you bloody KSRM guys मगर आज जीवन के इस पड़ाव पर उनकी कही हुई सारी बाते के सच लगने का ही ये परिणाम था कि मेरे कदम बेधड़क उनके केबिन कि तरफ बढ़ गये और हाथ उनके अभिवादन में आगे कि तरफ बढ़ गये। खैर सबसे मिलने का ये कार्यक्रम मैंने जल्दी - जल्दी पूरा किया क्योंकि मन तो जल्दी से हॉस्टल पहुचने को बैचैन हो रहा था। मन में पता करने कि लालसा लगी हुई थी कि कौन-कौन से मेरे दोस्त (कॉलेज की भाषा में मेरे कमीने दोस्त) आये हैं। अभी मै हॉस्टल के गेट पर ही पहुंचा था कि विवेक मिल गया और फिर शुरु हुआ कैम्पस वाली स्वागत करने का अंदाज (जिसे हम वास्तविक जिंदगी में Non-veg बोलते है)।
सबसे हाल-चाल होने के बाद मै अपने कुछ खास दोस्तों के साथ भुबनेश्वर से 60-70 km दूर सपत्सजा की सातों पहाड़ियों के वादियों में खोने चला गया जहाँ के मंदिर में मैंने इक बार फिर से आने और उन्ही फूल जैसे हाथों से पूजा करने की कसमे खायी थी। ये वो जगह था जहाँ मैंने दूसरी बार पूजा करने के साथ साथ खूब मस्ती भी करी। उन सारी मस्ती को अपने कैमरे में कैद भी किया। फिर हमलोग जल्दी से वापस आने लगे क्योंकि अगला कार्यक्रम फ़िल्म देखने का था। सीढियों से होते हुए जैसे ही मै अपनी गाड़ी के पास पंहुचा तभी दो बंदरो की नजर मेरे हाथ में लिये हुए प्रसाद पर पड़ी और वो मेरी तरफ दौड़ पड़े। वैसे तो मै अपने आप को बहुत हिम्मती समझता था मगर उनके सामने मेरे सारे हिम्मत की हवा निकल गई और मै प्रसाद छोड़ कर भाग खड़ा हुआ। किसी भी तरह अपने मन को तस्सली दी कि चलो कम से कम बंदरों ने तो प्रसाद का आनंद लिया।
वापस पहुचने के बाद मै, वंदना और संकल्प (जिनको मै क्रमशः डर र र र , सेंकी बोलता हूँ) फ़िल्म नौर्निया देखने लगे। वैसे तो संकल्प बाबु को तो फ़िल्म बहुत पसंद आई क्योंकि वो उनके ही लायक थी मगर उनके इमोसन को ध्यान में रखते हुए मै और वेंडी दोनों ने कैसे भी करके फ़िल्म को झेल लिया। उसके बाद तो और मजा आया जब रिजर्व औटो के Rs. 60 के बजाय अपने संकल्प बाबु को चालू औटो का Rs. 80 किराया देना पड़ा। कुलमिला कर अगर देखा जाये तो ये मेरे और संकल्प के लिये कुछ खास ही यादगार पल रहा क्योंकि उस रात वंदना कि चाल और उसकी हसीं को याद कर कर के मैं सो ना सका और संकल्प बाबु को फ़िल्म के मजे के साथ-साथ इक अलग सा ही अनुभव मिला वो भी भुबनेश्वर के औटो वालों का।
अगले दिन हमलोग वाटर पार्क का भी आनंद लिये जहाँ इस ठंढ के मौसम में भी हमलोगों ने मस्ती की। उन मस्ती क्रम में मै कुछ खास लोगो के साथ बिताये गये कुछ खट्टी तो कुछ मीठी यादें अपने साथ संजो ली ये सोच कर कि कही इने भूल ना जाऊ।
इन सारी मस्ती के बीच मै ये भूल गया था कि अगली सुबह मेरी इस यादगार सफर का अंतिम और वो यादगार पल होने वाला था जब दिल्ली के मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित के मौजूदगी में हमलोगों को MBA Rural Management की डिग्री दी जाने वाली थी। फिर अगले दिन सुबह 7:30 को मै इक बार फिर से अपने कैम्पस पंहुचा। अब कैम्पस की बात हो और हॉस्टल के मेस कि बात ना हो ये कहा से संभव था और आज कल तो BBA की खुबसूरत परियां भी उसी मेस में आने लगे थे वरना हमलोगों के समय तो बस लड़के ही लड़के दिखतें थे। बस फिर क्या था मैंने भी अपने दोस्तों के साथ-साथ उनके खूबसूरती को निहारता हुआ सुबह के नास्ते में बने दोसे का आनंद लिया और फिर अपने कन्वोकेसन में शामिल होने पहुच गया जहा पर वो MBA के खुबसूरत चेहरे भी आये हुए थे जिनको देख-देख कर हमलोग अपने दिल को सुकून दिलाया करते थे। अपने सुबोध भाई तो इतना सुकून दिलाते थे कि उनकी बालों कि खेती ही उजड़ने लगी थी, खैर आज कल फिर से हरा-भरा हो रही है। फ़िर मैंने भी अपने दिल और आँखों को सपनो से निकाल कर वास्तविकता में लाया और अपने डिग्री प्राप्त की।
उसके बाद फ़िर से वही समय आया जब मुझे कहना था bye bye KIIT और bye bye भुबनेश्वर। सामने खड़ा वही जुदाई का गम मेरा इंतजार कर रहा था। ये वो समय था जब सारी ख़ुशी इक बार फ़िर से जुदाई की ग़मों में तब्दील होने वाली थी। चेहरें पर हंसी तो जरुर दिख रही थी मगर दिल अन्दर ही अन्दर रो रहे थे। एक दुसरे से आँखे मिला नहीं पर रहे थे कि कही ये भीग चुके पलके सावन कि तरह बरस ना पड़े।
चाह कर भी मै उनलोगों के बस एक दिन और रुक जाने कि विनती को मान नहीं सका जिनके हर बात कि मै कद्र करता हूँ और उनको ये भी नहीं दिखा सकता था कि मै अपने विवशता पर अन्दर ही अन्दर कितने आंसू बहा रहा हूँ। फ़िर वो शाम आई और मै सबसे मिला, अपने उस यादगार जगह पर जाकर बैठा भी, मेरी तो बस यही तम्मना थी कि मै हर एक यादों को ताजा कर लू। उन्हें इक अलग अंदाज में अपने साथ संजो कर लाऊ। कुछ अपने दिल में, तो कुछ अपने आँखों में, तो कुछ अपने कैमरों में। उस जुदाई के गम के डर से चाहते हुए भी मै सबके साथ कुछ देर और ना बैठ सका। डर था कि कही ये आँखे के पलकों में कैद आंसू अपने आप बहार ना आ जाये।
और फ़िर अलविदा कहने से पहले अपनी दोनों बाँहों को उस खुदा के तरफ फैला दी और कहा कि ऐ मेरे खुदा तू एक बार आ के देख कभी, कि तेरी इस बनाई धरती पर जुदाई का गम क्या होता है, तू भी कभी महसूस करके देख इस दर्द को जहाँ दिल जलते है गमे जुदाई में और आँखे रोती है उनकी रुसवाई में।
और फ़िर मैं वापस निकल पड़ा उन्ही रास्तों पर जहा फ़िर से इक नयी यादें, ढेरों काम के साथ मेरा इंतजार कर रही थी।
Shashi Kant Singh

2 comments:

  1. really very nic awesom fabulous .........gr8 go on

    ReplyDelete
  2. Meri Jaan Shashi Kasam se yaar tune ye Ehsaas dila diya ki Convocation mei na aakar humne kitni badi galti ki hai...sach mei yaar ye office lyf mei kuch bhi apna nahi bacha saala isse to achcha college mei the jab chahte the chale jaate the....

    Hey request all my juniors to please arrange a Alumini meet in 2011 so that we can attend the same and recall our own days.....

    BTW Shashi beta awesome work done.... saale tu to koi naya naam bhi rakh le for eg. Shashi Bihar waale/Ranchi waale etc he he he

    ReplyDelete