Thursday, April 9, 2009

Rishto ki ahamiyat

पल - पल महकतीं रीश्तों की खुशबु, लम्हा - लम्हा गुजरते खुशीयों के पल -----
कभी मीठी तकरारे, कभी मीठे जज्बात और उससे भी कही खास होता है अपनों का प्यार, जो ईट - गारे के मकान को घर बना देता है। अपनों के लिए कुछ कर गुजरने का हौसला देता है ..........
अगर ये रिश्ते इतने अटूट न होते, ये बंधन इतने प्यारे नही होते तो बच्चो के लिये माँ यूँ रात - रात भर जागकर लोरी न सुनती, पापा घंटो साथ टहल कर, उंगली पकड़ कर चलाना न सिखलाते।
पर ऊमर भर रिश्तो को ऐसी ही अहमियत मिले, ऐसा कहा होता है। कभी - कभी छोटी - सी तकरार ही अहम मुद्दा बन जाती है, तो कभी खून के रीश्तों में ही इतनी कड़वाहट आ जाती है कि साथ रहना भी मुश्किल हो जाता हैं ......
और पछतावा तब होता है जब बहुत कुछ खो जाता हैं। इसलिए रिश्तों की अहमीयत को समझना बहुत ही जरुरी हैं।
रिश्तों की बगिया उमर भर महकाए रखना कोई मुश्किल काम नही हैं। बस हमें इतनी कोशिश करनी होती है की हम अपने रिश्तों की डोर में गांठ न पड़ने दे। मन में कोई ऐसी बात न आने दे जो दिलों के फासलें की वजह बने। रिश्तों में इतनी दुरी न आने पायें की साथ रहते हुए भी एक का दर्द दुसरे तक न पहुंचे।
यदि अपना थोड़ा - सा वक्त उन रिश्तों को दे पायें, उनकी छोटी - छोटी खुशीयों की क़द्र कर सकें, तो दिलों की दूरियों की वजह ही नही होगी।
रिश्ते जींदगी के लीये होते है, जींदगी रिश्तों के लीये नही ...............................

6 comments:

  1. ur alwayz gr8
    awesome written (dil ko chooun liya)........
    kas yeh mere liye hota i would b very proud tht someone feel so much for me n care for my relationship .......

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  3. nicely written...
    is it urs??

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  4. jitna bar padta hoon utna aacha lagta hai......
    this is one of my fav tht all u hv written....
    i realllyyyyyyy can feel.....

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